24 जनवरी को मंदिरजी के शिखर पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम होगा
प्रधान संपादक रूपचंद मेवाड़ा सुमेरपुर

“संवाददाता हिम्मत देवड़ा चाणोद फालना
प्रभु की मन मंदिर में प्रतिष्ठा जरूरी है”
फालना जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी म.सा. की शुभ निश्रा में आज से केसरीयाजी नगर–फालना में मातुश्री सुखीबाई छगनलालजी धोका परिवार द्वारा स्वद्रव्य से निर्मित श्री केसरीयाजी आदिनाथ जैन मंदिर की 25वीं वर्षगांठ निमित्त त्रिदिवसीय भव्य महोत्सव का शुभारंभ हुआ। प्रातः 9:00 बजे सर्वोदय आराधना भवन से शिवशंकर म्यूज़िकल बैंड की रमझट के साथ केसरीयाजी नगर हेतु भव्य प्रवेश हुआ। समस्त धोका परिवार ने नाचते–झूमते हुए आचार्यश्री का भव्य स्वागत किया। परिवार की महिलाओं ने 25 मंगल कलशों के साथ गुरुभगवंतों की प्रदक्षिणा दी ।
फिर भव्य पंडाल में जैनाचार्यश्री का प्रेरणादायी प्रवचन हुआ। प्रवचन में आचार्यश्री ने कहा कि —
भगवान की प्रतिष्ठा मंदिर में होने से पहले मन मंदिर में होनी जरूरी है। अपना मन संसार के अनेक विचार और विकारों से भरा हुआ है। इस मन में प्रभु की प्रतिष्ठा करने से पहले भीतर की गंदगी दूर कर के मंदिर स्वरूप बनाना खूब जरूरी है। जब तक मन में काम, क्रोध, मोह-माया, ईर्ष्या-द्वेष आदि मलिन विचारों का अस्तित्व रहता है, तब तक मन में परमात्मा की प्रतिष्ठा नहीं हो सकती, क्योंकि परमात्मा तो पवित्र–पवित्र मंदिर में ही रहते हैं। अतः अपनी मानसिक मलिनता को दूर करने के लिए परम पवित्र ऐसे परमात्मा के दर्शन, वंदन, पूजन का आलंबन लेना जरूरी है।
प्रवचन के बाद संगीतकार नरेन्द्र सालेचा ने गुरुभक्ति गीत प्रस्तुत किया। धोका परिवार की ओर से आचार्यभगवंत को कामली अर्पण कर अक्षत वधामणा किया । कार्यक्रम के बाद मंदिरजी में अठारह अभिषेक का विधान हुआ।

दि. 23 जनवरी को प्रातः 10:00 बजे प्रवचन एवं तत्पश्चात वर्धमान शक्रस्तव अभिषेक होगा।
24 जनवरी को मंदिरजी के शिखर पर ध्वजारोहण का कार्यक्रम होगा।
दि. 27 जनवरी को बाली नगर में जैनाचार्यश्री के सर्व विरति स्वर्ण वर्ष में मंगल प्रवेश निमित्त पाँच दिवसीय भव्य महोत्सव होगा। वहाँ जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी महाराज द्वारा आलिखित 264वीं पुस्तक का भव्य विमोचन, श्रुत वधामणा, शक्रस्तव अभिषेक, रत्नकुक्षी माता-पिता सम्मान, आदि भव्य कार्यक्रम होंगे।




