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तीर्थकर के अभाव में आचार्य भगवंत करते है धर्म का प्रकाश’

प्रधान संपादक रूपचंद मेवाड़ा सुमेरपुर

भैंरु चौक सुमेरपुर से 27/3/26‌‌  जैनाचार्य श्रीमद् विजय रत्नसेन सूरीश्वरजी म. सा. की शुभनिश्रा में श्री वासुपूज्य स्वामी श्चेताम्बर

 मूतिपूजक जैन संघ-भैरु चौ क सुमेरपुर के प्रांगण में सौभाग्य सुन्दर परिवार की ओर से सौभाग्य सुन्दर नवपद महोत्सव के भव्य आयोजन का आज तीसरा दिन। आज आचार्य पद की आराधना के प्रसंग पर धर्मसभा में प्रवचन देते हुए जैनाचार्यश्री ने कहा कि- जगत् के जीवों को शाश्व़त समाधान के स्थान

स्वरूप मोक्ष का मार्ग तीर्थकर परमात्मा बताते है। परंतु तीर्थंकरों का अस्तित्व मर्यादित काल के लिए ही होता है। फिर भी उनके द्वारा बताया गया मोक्ष का मार्ग लम्बे समय तक चलाने का कार्य आचार्य भगवंत ही संभालते है।

जिस काल में इस पूथ्वीतल पर तीर्थंकर भगवंत रूपी सूर्य और केवलज्ञानी भगवंत रूपी चन्द्र का अस्तित्व नहीं होता,तब मोक्ष मार्ग बताने का काम दीपक के समान आचार्य भगवंत करतें है ।तीर्थकर के विरह में जैन धर्म के तत्त्वज्ञान को अपने विशुद्ध देशना गुण के द्वारा जो प्रकाशित करते है। वे आचार्य भी तीर्थंकर समान कहे जाते हैं।

अपने शिष्यवर्ग के अनुशासन के लिए आचार्य भगवंतो की एक आँख में अमृत तो दूसरी आँख में आग भी होती है।देव और धर्म तत्व के बीच गुरुतत्व है। दो कमरे के बीच रहे दीपक की तरह गुरु ही देवतत्त्व और धर्म तत्व को प्रकाशित करते हैं। ऐसे गुरु तत्त्व को जीवन का समर्पण करना शिष्य का परम कर्तव्य है।

गुरु समर्पण की अनुपम भावना से ही शिष्य कॆ जीवन में ज्ञान -आदि गुणों का विकास होता है भगवान महावीर स्वामी के प्रथम शिष्य श्री गौतम स्वामी की गुरु भक्ति अनुपम थी। इस गुरुभक्ति के फलस्वरूप ही उन्हें ऐसी लब्धि प्राप्त हुई थी कि वे जिसे भी दीक्षा देते उसे केवलज्ञान प्राप्त हो जाता था ‌ऐसे भूतकाल में अनेक आचार्य भगवंत हुए है जिन्होंने धर्म कि आराधना,प्रभावनाऔर रक्षा के कार्यों में अपने प्राणों का भी बलिदान दिया है।36-36 गुणों से सुशोभित आचार्य भगवंतों के प्रति हमारे जीवन मे कृतज्ञता एवं समर्पण भाव होना चाहिए।

भक्ति संगीत के साथ भावाचार्य वंदना का कार्यक्रम हुआ, जिसमें अमदाबाद से पधारे केतुलभाई- तपोवनी ने अनेक आचार्य भगवंतों के जीवन पर चरित्रों का वर्णन किया ।शाम -8:00 बजे जैन युवा मंडल के द्वारा प्रभु भक्ति की रमझट मचाईं गई ‌ दि:28 मार्च को प्रातः 9:00 बजे प्रवचन एवं 2:30बजे शत्रुंजय-गिरनार महातीर्थ भाव यात्रा का कार्यक्रम होगा।

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