ग्रीन आर्मी मैन ओमप्रकाश कुमावत की प्रेरणा बनी मिसाल, दंपती ने दो दिनों में तैयार किए 2001 सीड बॉल
प्रधान संपादक रूपचंद मेवाड़ा सुमेरपुर

ग्रीन आर्मी मैन ओमप्रकाश कुमावत की प्रेरणा बनी मिसाल, दंपती ने दो दिनों में तैयार किए 2001 सीड बॉल
सुमेरपुर। “एक व्यक्ति – एक पौधा मिशन राजस्थान” के तत्वावधान में संचालित “घर का बीज, जंगल पहुँचाओ” महाअभियान के अंतर्गत ग्रीन आर्मी मैन एवं पर्यावरण प्रेमी ओमप्रकाश कुमावत की प्रेरणा से सुमेरपुर के संजयनगर निवासी दंपती शकुन कुमारी एवं प्रकाश कुमार ने अपने परिवार के सहयोग से मात्र दो दिनों में 2001 सीड बॉल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने सीड बॉल दूत के रूप में समाज के अधिक से अधिक लोगों से इस जनअभियान से जुड़कर प्रकृति संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सीए चेतन अरोड़ा ने बताया कि सीड बॉल निर्माण में स्थानीय जलवायु के अनुकूल देशी प्रजातियों के बीज, जैसे बबूल, खैर और कुमठा का उपयोग किया गया है। ये वृक्ष कम पानी में भी आसानी से विकसित होते हैं,प्रवीण सिंह सिंगा ने बताया कि पौधे मिट्टी संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं तथा जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं। वर्षा ऋतु में इन सीड बॉल को जंगलों, पहाड़ियों और बंजर भूमि पर फैलाने से प्राकृतिक रूप से हजारों नए पौधों के विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।
ग्रीन आर्मी मैन एवं पर्यावरण प्रेमी ओमप्रकाश कुमावत ने बताया कि अभियान का उद्देश्य प्रत्येक घर से जामुन, गुंदी, जाल, संतरा, राण, नीम, नींबू, आम, पपीता सहित अन्य उपयोगी देशी वृक्षों के बीज एकत्र कर उन्हें सीड बॉल के माध्यम से प्रकृति को समर्पित करना है। यदि प्रत्येक परिवार अपने आसपास उपलब्ध देशी बीजों से सीड बॉल तैयार करे, तो आने वाले वर्षों में लाखों नए वृक्ष तैयार किए जा सकते हैं। यह पर्यावरण संरक्षण का सरल, कम खर्चीला, जनभागीदारी पर आधारित तथा अत्यंत प्रभावी अभियान है।
सीड बॉल निर्माण में प्रवीण सिंह सिंगा,लक्ष्मण कुमार चुली,पोनी देवी,देशाराम मेघवाल,पातू देवी एवं अनुष्का कुमारी,अंजलि कुमारी, मोहनलाल,सहित परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उत्साहपूर्वक श्रमदान किया। सभी ने संकल्प लिया कि वर्षा ऋतु में अधिक से अधिक देशी प्रजातियों के सीड बॉल जंगलों एवं बंजर क्षेत्रों में समर्पित कर हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ इस महाअभियान से अधिकाधिक लोगों को जोड़कर पर्यावरण संरक्षण की अलख जगाएंगे।

