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अंबिका मंदिर सांडेराव के शिखर पर चढ़ाई धर्म धजा

प्रधान संपादक रूपचंद मेवाड़ा सुमेरपुर

*वैदिक मंत्रो उच्चारण व जैकारो के बीच अम्बिका मंदिर के शिखर पर चढाई धर्म ध्वजा अम्बिका मंदिर के 36 वें वार्षिकोत्सव पर हुए धार्मिक आयोजन, दुर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओ ने लगाई धोक*

*साण्डेराव-* श्री मेवाडा क्षत्रिय कलाल समाज साण्डेराव की गायत्री उपासक साध्वी जमनादेवी द्धारा मां अम्बिका की विशेष भक्ति के दौरान मंदिर बनाने की ललक को लेकर अपनी आजीविका से बचत स्वयं की कमाई से एक विशेष भव्य शिखरबंद मंदिर का निमार्ण वर्ष 1990 में करवाकर प्राण प्रतिष्ठा के बाद मां की प्रतिमा विराजित की थी। इस मंदिर की 36 वीं वर्षगांठ पर शुक्रवार सुबह संत मनसुख हिरापुरी महाराज के सानिध्य में पंडितो द्धारा वैदिक मंत्रो उच्चारण के बीच गाजो-बाजो के साथ मंदिर के शिखर पर जैकारो लगाते हुए धर्म ध्वजा चढाई गई। इस दौरान विशेष पुजा-अर्चना के बाद महाआरती हुई जिसमें मेवाडा क्षत्रिय कलाल समाज परिवार के सदस्यो सहित सनातन धर्मप्रेमियो ने भाग लिया। दुर-दराज से पहुंचे लोगो ने मां के देवरे में धोक देकर परिवार के लिए खुशहाली की मन्नते मांगी।

 

*धार्मिक आयोजन से बढता है अपनत्व :-* 36 वें वार्षिकोत्सव पर आयोजित धार्मिक महोत्सव में प्रवचन करते हुए संत रामदास महाराज ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजनो से अपनत्व व आपसी भाईचारा बढता है, साथ ही दुर-दराज से पहुंचे समाज बंधुओ का भी मेल-मिलाप होता हैं। संत ने कहा कि धर्म के कार्य में खर्च किया हुआ धन कभी व्यर्थ नही जाता है।

*अधिकांश समय साधना में लीन रहती थी साध्वी जमनादेवी :-*

क्षत्रिय राजपूत समाज के जयदेव सिंह राणावत ने कहा कि श्रीमेवाडा क्षत्रिय कलाल समाज की गायत्री उपासक साध्वी जमनादेवी एक गरीब परिवार से थी जो 16 वर्ष की उम्र में ही मां अम्बे की भक्ति से लगाव करते हुए धीरे-धीरे अत्यंत कठिन तप-तपस्या करने लगी। परिवारिक जीवन अपनाते हुए एक अध्यापिका के रूप में क्षैत्र के विभिन्न विद्यालयों में अध्ययन करवाने के साथ शिक्षा के क्षैत्र में भी अपना नाम रोशन किया। 24 वर्षो तक अन्न का त्याग कर मां की आराधना करते हुए अपनी निजी कमाई से मां का मंदिर निमार्ण करवाकर संत-सम्मेलन व प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अपना व्रत खोल अन्न ग्रहण किया था। मंदिर प्रतिष्ठा के बारह वर्षो बाद साध्वी का देवगमन हो जाने पर परिवार जनों ने मंदिर के ठीक सामने अक्षय तृतीया के दिन विधि-विधान से गाजो-बाजो के साथ समाधी दी थी। आज हम सभी इस महान तपस्वी को नमन करते है। जिन्होने तपस्या के दौरान अपना तथा अपने गांव, समाज का रोशन किया।

*इन्होने किए दर्शन :-* मंदिर के वार्षिकोत्सव पर मारवाड-गोडवाड जन कल्याण सेवा समिति अध्यक्ष जयदेवसिंह राणावत, मेवाडा समाज के प्रचारक नटवर मेवाडा,हरिश ताराचंद जी कलाल,विक्रम मेवाडा,महेश मेवाडा, कैलाश मेवाडा, महावीर मेवाडा, प्रथम मेवाडा,सानवी मेवाडा सहित दुर-दराज से पहुंचे समाज बंधुओ के साथ ग्रामीणों ने मां के दर्शन कर खुशहाली की कामना की।

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