सम्यग् दर्शन के बिना ज्ञान-चरित्र और तप भी निष्फल है
प्रधान संपादक रूपचंद मेवाड़ा सुमेरपुर

जैनाचार्य श्री रत्नसेन सूरीश्वरजी की शुभ निश्रा में श्री वासुपूज्य श्चेताम्बर मूर्तिपूजक जैन संघ – भैरुचौक-सुमेरपुर की धन्यधरा पर सौभाग्य सुन्दर नवपद महोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ चल रहा है। पिछले 100 वर्षों के इतिहास में सुमेरपुर नगर मे इतने बड़े पैमाने पर नवपद ओली के आयेजन का प्राय: प्रथम प्रसंग है। 350 से अधिक नवपद ओली के आराधक प्रतिदिन आयंबिल तप की तपशचर्य कर रहे है। तो साथ ही प्रतिदिन प्रेरक प्रवचन, विविध अनुष्ठान, संध्या भक्ति के सुन्दर आयोजन से आराधना का त्रिवेणी संगम बना है।.
धर्मसभा में प्रवचन देते हुए जैनाचार्यश्री ने कहा कि -जैसे 500 रुपये नोट पर गवर्नर के हस्ताक्षर न हो अथवा लाख रुपये के चेक पर हस्ताक्षर न हो तो उस नोट या चेक की कोई कीमत नहीं है।.
वैसे ही जीवन में,चाहे कितना ही ज्ञान हो , चाहे कितना कठोर चारित्र का पालन हो या चाहे कितना उग्र तप हो लेकिन सम्यग् दर्शन न हो सारा ज्ञान भी अज्ञान है, एवं सारा चारित्र पालन और तपाचरण सिर्फ काया को क्लेश देने के समान निरर्थक ही है।
सम्यग् दर्शन यानी जिनेश्वर भगवंतों ने जो कहा है, वह सत्य एवं शंका रहित हैं ऐसी दृढ
श्रद्धा द्रव्य चारित्र के बिना भी सर्वकर्मक्षय और मुक्ति की प्राप्ति हो सकती है परंतु सम्यग् दर्शन के बिना सर्वकर्मक्षय और मुक्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती है।.
सम्यग् दर्शन गुण के प्रभाव से जीवात्मा संसार निर्लेप मे रहते हुए भी कमल,की तरह रहती है।जैसे कमल ,कीचड़ में पैदा होता है, जल से हुए बढ़ता है परंतु दोनों से निर्लेप रहता है, वैसे ही सम्यग् दर्शन को पायी हुए आत्मा संसार में रहते हुए और संसार के सुख का अनुभव करते हुए भी जलकमलवत् अलिप्त रहती है।.
जीवन में सम्याग् दर्शन गुण की प्राप्ति होने के बाद पापकर्म कार्यों में तीव्र रस नहीं रहता है ।पाप के भय के कारण पहले नम्बर पर तो वह पाप कार्य करता नहीं है। एवं यदि मजबुरी में पाप कार्य को करे तो भी अनिच्छा से करने के कारण उसे पाप कर्म का बंध नहीं होता है।.
दोपहर 2:30 बजे विविध औषधियों से मिश्रित जल से वर्तमान शक्रस्तव महाभिषेक का भक्ति संगीतमय कार्यक्रम हुआ ।शाम को 8:00 बजे मुंबई से पधारे संगीतकार हेनी भाई ने संध्या भक्ति की रमझट मचाई।.
दि. 31 मार्च को 24 वें तीर्थकर श्री महावीर स्वामी प्रभु के जन्म कल्याणक निमित्त प्रातः 8:30 बजे गाजे-बाजे के साथ भव्य रथयात्रा होगी। दोपहर 2:30 बजे भगवान महावीर का पालना, और 56 दिक्कुमारी महोत्सव का भव्य आयोजन होगा।. रहती है।जैसे कमल ,कीचड़ में पैदा होता है, जल से हुए बढ़ता है परंतु दोनों से निर्लेप रहता है, वैसे ही सम्यग् दर्शन को पायी हुए आत्मा संसार में रहते हुए और संसार के सुख का अनुभव करते हुए भी जलकमलवत् अलिप्त रहती है।.
जीवन में सम्याग् दर्शन गुण की प्राप्ति होने के बाद पापकर्म कार्यों में तीव्र रस नहीं रहता है ।पाप के भय के कारण पहले नम्बर पर तो वह पाप कार्य करता नहीं है। एवं यदि मजबुरी में पाप कार्य को करे तो भी अनिच्छा से करने के कारण उसे पाप कर्म का बंध नहीं होता है।.
दोपहर 2:30 बजे विविध औषधियों से मिश्रित जल से वर्तमान शक्रस्तव महाभिषेक का भक्ति संगीतमय कार्यक्रम हुआ ।शाम को 8:00 बजे मुंबई से पधारे संगीतकार हेनी भाई ने संध्या भक्ति की रमझट मचाई।.
दि. 31 मार्च को 24 वें तीर्थकर श्री महावीर स्वामी प्रभु के जन्म कल्याणक निमित्त प्रातः 8:30 बजे गाजे-बाजे के साथ भव्य रथयात्रा होगी। दोपहर 2:30 बजे भगवान महावीर का पालना, और 56 दिक्कुमारी महोत्सव का भव्य आयोजन होगा।.



