इंद्रजीत हत्याकांड: फालना थाने के बाहर उमड़ा जनसैलाब, निष्पक्ष जांच के लिए राजपुरोहित व सर्व समाज का महाधरना
प्रधान संपादक रूपचंद मेवाड़ा सुमेरपुर

भारी पुलिस जाब्ता तैनात; प्रदर्शनकारियों ने चेताया— कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा और उग्र
सांडेराव। खुडाला फालना के चर्चित इंद्रजीत हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर रविवार को फालना पुलिस थाने के बाहर राजपुरोहित समाज और सर्व समाज का गुस्सा फूट पड़ा। राजस्थान प्रदेश राजपुरोहित महासभा के आह्वान पर आयोजित इस महाधरने में क्षेत्र के विभिन्न गांवों सहित पड़ोसी जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, जिससे थाना परिसर के बाहर का पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया।
सुबह 9 बजे से ही धरना स्थल पर लोगों का जुटना शुरू हो गया था। दोपहर होते-होते जनसैलाब इतना बढ़ गया कि पुलिस प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए अतिरिक्त जाब्ता तैनात करना पड़ा।
किसी भी दबाव में झुकेंगे नहीं: जबर सिंह
धरने को संबोधित करते हुए महासभा के प्रदेश अध्यक्ष जबर सिंह राजपुरोहित ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, “आज उमड़ी यह भीड़ इस बात का सबूत है कि जनता अब पुलिस की ढीली कार्रवाई और राजनीतिक दबाव को बर्दाश्त नहीं करेगी। हत्या को हादसा बताने की कोशिशों को सर्व समाज बेनकाब करके रहेगा।” उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने बिना किसी राजनीतिक प्रभाव के, वैज्ञानिक और तथ्यात्मक साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की और असली हत्यारों को जेल नहीं भेजा, तो यह आंदोलन केवल फालना तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे संभाग और प्रदेश स्तर पर चक्का जाम किया जाएगा।
पड़ोसी जिलों से भी पहुंचे लोग, व्यवस्था रही मजबूत*
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ नेता राम सिंह राडबर और शैतान सिंह वरकाणा की कार्ययोजना के तहत सिरोही, जालोर और आहोर क्षेत्र से भी समाज बंधु गाड़ियों के काफिलों के साथ धरना स्थल पहुंचे। धरने के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए वरिष्ठ पदाधिकारियों ने स्वयं कमान संभाली और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखीं।
इन प्रमुख नेताओं ने किया संबोधित-*
धरना प्रदर्शन में गुलाब सिंह नाडोल, रतन सिंह बारवा, जय सिंह रानी गांव, एडवोकेट करण सिंह काडू, जोग सिंह चाड़वास, अमर सिंह रूपावास, मदन सिंह बागड़िया सहित महिला महासभा की जिलाध्यक्ष शोभा राजपुरोहित ने भी विचार व्यक्त किए और पीड़ित परिवार को जल्द से जल्द न्याय दिलाने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक समाज के मुख्य प्रतिनिधिमंडल और पुलिस अधिकारियों के बीच वार्ता का दौर जारी था।




